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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
गांधी दर्शन और सर्वोदय की अवधारणा
Authors
डॉ. अमिता मीना
Abstract
महात्मा गांधी का दर्शन आधुनिक भारतीय चिंतन की सबसे प्रभावशाली धाराओं में से एक है, जिसने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी, बल्कि एक नैतिक, समतामूलक और मानवीय समाज की कल्पना भी प्रस्तुत की। गांधी के विचारों का मूल आधार सत्य ;ैंजलंद्ध और अहिंसा ;।ीपउेंद्ध है, जिनके माध्यम से उन्होंने सामाजिक परिवर्तन का एक अनूठा मार्ग प्रस्तुत किया। गांधी की सामाजिक और आर्थिक दृष्टि का केंद्रीय तत्व “सर्वाेदय” की अवधारणा है, जिसका अर्थ हैकृसभी का उदय या सभी का कल्याण। यह अवधारणा केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान भी शामिल है ।
गांधी के अनुसार, समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब सबसे कमजोर और वंचित व्यक्ति का भी उत्थान सुनिश्चित किया जाए। इस विचार को उन्होंने “अंत्योदय” के सिद्धांत के रूप में भी व्यक्त किया, जो सर्वाेदय का ही एक महत्वपूर्ण आयाम है । यह शोध-पत्र गांधी दर्शन और सर्वाेदय की अवधारणा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें इसके दार्शनिक आधार, प्रमुख सिद्धांत, व्यावहारिक प्रयोग, आलोचनाएँ तथा समकालीन प्रासंगिकता का गहन अध्ययन किया गया है।

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Pages:67-69
How to cite this article:
डॉ. अमिता मीना "गांधी दर्शन और सर्वोदय की अवधारणा". International Journal of Educational Research and Studies, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 67-69
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