प्रस्तुत शोध का उद्देश्य राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की नेतृत्व क्षमता और कार्यशैली का उनके विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। यह अध्ययन सर्वेक्षण विधि पर आधारित है और इसे उदयपुर एवं डूंगरपुर जिलों के चयनित उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संपन्न किया गया। अनुसंधान हेतु कुल 50 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को उद्देश्यपूर्ण न्यादर्श पद्धति द्वारा चयनित किया गया।
शोध में स्वनिर्मित एवं विशेषज्ञों द्वारा मान्य उपकरणों का उपयोग किया गया। आंकड़ों के विश्लेषण के लिए प्रतिशत, मध्यमान, मानक विचलन तथा क्रांतिक अनुपात (CR) जैसी सांख्यिकीय प्रविधियों का प्रयोग किया गया।
अध्ययन निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि राजकीय एवं निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के शैक्षणिक नेतृत्व व्यवहार और प्रबंधकीय प्रभावशीलता में समग्र दृष्टि से कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं है। तथापि, क्षमता उत्प्रेरक (Capacity Building) के आयाम में निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य राजकीय विद्यालयों की तुलना में अधिक प्रभावी पाए गए। इसी प्रकार, प्रबंधकीय प्रभावशीलता के कार्यात्मक, पारस्परिक और व्यक्तिगत आयामों में दोनों समूहों के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं देखा गया।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि यद्यपि दोनों प्रकार के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का सामान्य नेतृत्व व्यवहार लगभग समान है, किंतु निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य अधिक प्रेरक क्षमता का प्रदर्शन करते हैं, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण सकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्त, शोध यह सुझाव देता है कि जनजातीय क्षेत्रों के राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को संगठित नेतृत्व और प्रबंधकीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाना आवश्यक है, ताकि उनकी प्रभावशीलता में वृद्धि हो और विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
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