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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
भारत में उच्च शिक्षा की समस्याएँ एवं उनके समाधान
Authors
डा. विभा भारद्वाज
Abstract
स्वतन्त्रता के पश्चात उच्च शिक्षा का तीव्र गति से विकास हुआ है। उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ इनमें गिरावट भी आयी है। गुणात्मक सुधार की ओर ध्यान कम दिया गया है। यही कारण है कि छात्र विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करने के पश्चात भी रोजगार प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यह शिक्षित बेरोजगारी अन्य समस्याओं के जन्म का कारण बन चुकी है। आज छात्र का ध्यान ज्ञानार्जन की ओर कम तथा येन-केन प्रकारेण डिग्री प्राप्त करने की ओर अधिक है। उनमें उस योग्यता का अभाव है जो इस स्तर पर होनी चाहिए। इस स्तर पर आज अनेक समस्याएँ हैं जिनका निदान निकाला जाना अत्यन्त आवश्यक है।
उच्च शिक्षा का भी देश के योग्य नागरिकों का निर्माण करने की दृष्टि से अत्यन्त महत्व है। इस स्तर पर विविध अनिवार्य, ऐच्छिक अथवा विशिष्टीकरण पाठयक्रमों का अध्ययन करने के उपरान्त ही अधिकांश विद्यार्थी राष्ट्र के अनेक महत्वपूर्ण एव उच्च पदों के योग्य बनते हैं। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए ही उच्च शिक्षा आयोग एवं कोठारी आयोग के द्वारा भारत सरकार को उच्च शिक्षा में सुधार करने हेतु अनेक सुझाव दिये गये थे। इन सुझावों को स्वीकार करके यद्यपि सरकार ने समय-समय पर अनेक प्रयास किये भी हैं, परन्तु इसके उपरान्त भी भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में अनेक समस्याएँ यथावत् दृष्टिगोचर होती हैं।
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Pages:1-5
How to cite this article:
डा. विभा भारद्वाज "भारत में उच्च शिक्षा की समस्याएँ एवं उनके समाधान". International Journal of Educational Research and Studies, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 1-5
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